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Showing posts from October, 2019

सच्चा प्यार पाने के सरल उपाय (टोटके )

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:- हीरा पहनने से शुक्र गृह मजबूत होता है | और जीवन में धन -स्त्री -प्रेम सभी शुक्र गृह के प्रभाव से संभव है | इसलिए ऊँगली में हीरा रत्न धारण करने से प्रेम में सफलता मिलती है(Totke For Love) | 6 मुखी रुद्राक्ष भी शुक्र गृह से सम्बन्धित होता है | 6 मुखी रुद्राक्ष को सिद्ध करके गले में धारण करने से भी सच्चा प्यार हासिल होता है और प्रेम संबंधो में भी मधुरता आती है | बुधवार की सुबह भगवान लक्ष्मी-नारायण के मंदिर जाए और साथ में एक पानी वाला नारियल – प्रसाद और 21 रूपये ले जाए | मंदिर में जाकर भगवान की प्रतिमा के समक्ष प्यार में सफलता के लिए अरदास लगाये और नारियल -प्रसाद और रूपये भगवान के चरणों में अर्पित कर दे | इस प्रकार लगातार 3 बुधवार इसी कार्य को करें | शीघ्र ही इसके परिणाम आपको देखने को मिलेंगे(Totke For Love) | प्रतिदिन सुबह पूजा के स्थान पर बैठकर इस मंत्र के 5 से 7 मिनट के लिए जप करें | मंत्र इस प्रकार है : ॐ क्लीं नम: | शुक्रवार की सुबह भगवान राधा -कृष्ण के मंदिर में जाकर उन्हें प्रेम पूर्वक बांसूरी व पान और कुछ दक्षिणा अर्पित करनी चाहिए साथ में मिठाई भी लेकर जाए | ऐसा आप लगातार...

मनचाही स्त्री का वशीकरण के उपाय।

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_____________________________________________ पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले में तांत्रिक साधना का बहुत प्रसिद्ध 51 शक्तिपीठों में तारापीठ है, जहां सिद्धि और साधानाओं के लिए संतों, संन्यासियों का जमावड़ा लगा रहता है। इस पीठ के मंदिर में तारा मां की पत्थर की बनी मूर्ति स्थापित है। मंदिर से कुछ दूरी पर मीलों तक फैला हुआ महाश्मशान है। _____________________________________________ पत्नी या प्रेमिका का वशीकरण रूठी हुई पत्नी या प्रेमिका को बंगाली तंत्र-मंत्र के वशीकरण प्रयोग से मनाया जा सकता है। इसी तरह कोई पुरुष अगर चाहे तो मतभेद या कलह की शिकार हो चुकी पत्नी या प्रेमिका को कसी भी माह के कृष्ण पक्ष की पहली तिथि से तांत्रिक प्रयोग शुरू कर अपनी ओर वशीभूत कर सकता है। इसका मंत्र इस प्रकार बताया गया हैः- _____________________________________________ काली चिड़िया चिंग चिंग बोले, काली बनकर जाए। अमुक को वश में करवाए, ना करवाई तो यति हनुमंत की आन!! _____________________________________________ इस मंत्र जाप से साधना करने वाले पुरुष को चाहिए कि वे इसके लिए एकांत कमरे में उत्तर या पूर्व की ओर मुंहकर आस...

दुश्मन से छुटकारा....

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कभी कभी हमारे आस पास या हमारे कार्य स्थान पर कोई न कोई हमारे विरुद्ध षड़यंत्र रच रहा होता है. इसका असर हमारे काम और मन दोनों पर पड़ता है. ____________________________________________________________________________________ _____________________________________________ आज के प्रयोग से उस इन्सान के सभी क्रियाकलापों पर पाबन्दी लग जाती है. _____________________________________________ यह प्रयोग बीज मंत्रो से युक्त है अतः पूर्ण सावधानी से करना चाहिए प्रयोग का दुरपयोग न करे अन्यथा स्वयं को ही हानि होगी शनिवार रात्रि ८ बजे बाद शिव मंदिर में जाए हनुमानी सिंदूर में उपले की राख मिला कर इसे पानी में घोट कर स्याही बना ले! अब शिवमंदिर में शिवलिंग के ही सामने एक कागज पर इस श्याही से एवं अनार की कलम से यह मंत्र सत्रु के नाम के साथ लिखे _____________________________________________ हूं ह्रौं हूं ह्रीं हूं फट् अमुक हूं ह्रौं हूं ह्रीं हूं फट् _____________________________________________ और इस मंत्र की ३ माला जाप करे! चाहे तो जाप घर पर कर सकते है परन्तु कागज वाली क्रिया आपको शिवलिंग के सामने ही करनी होग...

सरकारी नौकरी के उपाय

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भगवान शंकर का पूजन करें- मनचाही जॉब पाने के लिए भगवान शिव की आराधना करना चाहिए। हर सोमवार शिव जी के मंदिर में जाकर कच्चा दूध, साबुत चावल (जो टूटे हुए न हों) अर्पित करें और भोलेनाथ से अपने मन की बात कहें। ऐसा करने से आपकी नौकरी में आने वाली सारी मुसीबतें दूर हो जाएंगी। भगवान शिव का पूजन नौकरी पाने का अहम उपाय है। .............................................. बजरंग बली को करें प्रसन्न- अच्छी नौकरी पाने के लिए घर में हनुमान जी की हवा में उड़ती हुई तस्वीर लगाएं। इसके साथ ही मंगलवार के दिन श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें। किसी भी माह के मंगलवार से शुरू करते हुए 40 दिनों तक रोजाना नंगे पैर बजरंगबली के मंदिर में जाएं और उन्हें लाल गुलाब अर्पित करें।............,...............................नौकरी पाने के टोटके इंटरव्यू देने जाते समय यदि रास्ते में कोई गाय नज़र आ जाए तो उसे आटा-गुड़ खिला कर जाएं।........................................... ....................... एक नींबू के ऊपर चार लौंग गाड़ दें और 'ॐ श्री हनुमते नम:' मंत्र का 108 बार जाप करके नींबू को अपने साथ लेक...

नौ रत्न

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नौ रत्न मुख्य मणियाँ- वैसे मणियाँ तो असंख्य हैं, परन्तु मुख्यतः 9 मणियों की मान्यता अधिक है, जो निम्न ................................................................................................................................................ घृतमणि तैलमणि भीष्मक मणि उपलक मणि स्फटिक मणि पारस मणि उलूक मणि लाजावर्त मणि मासर मणि मणियाँ भी रत्नों की ही तरह ग्रहों के कारण उत्पन्न अनिष्ट को शांत करती हैं तथा मनोकामनाओं को पूर्ण करने में समर्थ होती हैं। इनका वर्णन निम्नवत है- इस मणि को अँगूठी में धारण करने से बुद्धि बल की वृद्धि होती है तथा शरीर से दुर्गन्ध नष्ट होती है। सदा निर्दोष मणि को धारण करना चाहिए अन्यथा हानि होना यह दो प्रकार की होती है- ................................................................................................................................................ 1. मोहिनी भीष्मक मणि। 2. कामदेव भीष्मक मणि। ................................................................................................................................................ मोहिनी भी...

श्री महामृत्युंजय कवच

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महामृत्युञ्जयकवचम् ॥ ************************************** श्री गणेशाय नमः । भैरव उवाच । श्रृणुष्व परमेशानि कवचं मन्मुखोदितम् । महामृत्युञ्‍जयस्यास्य न देयं परमाद्भुतम् ॥ १॥ ************************************** यं धृत्वा यं पठित्वा च श्रुत्वा च कवचोत्तमम् । त्रैलोक्याधिपतिर्भूत्वा सुखितोऽस्मि महेश्वरि ॥ २॥ ************************************** तदेववर्णयिष्यामि तव प्रीत्या वरानने । तथापि परमं तत्वं न दातव्यं दुरात्मने ॥ ३॥ ************************************** विनियोग: ************************************** अस्य श्रीमहामृत्युञ्‍जयकवचस्य श्रीभैरव ऋषिः, गायत्रीछन्दः, श्रीमहामृत्युञ्‍जयो महारुद्रो देवता, ॐ बीजं, जूं शक्‍तिः, सः कीलकं, हौमिति तत्वं, चतुर्वर्गसाधने मृत्युञ्‍जयकवचपाठे विनियोगः । ************************************** कवच: ************************************** चन्द्रमण्डलमध्यस्थं रुद्रं भाले विचिन्त्य तम् । तत्रस्थं चिन्तयेत् साध्यं मृत्युं प्राप्तोऽपि जीवति ॥ १॥ ॐ जूं सः हौं शिरः पातु देवो मृत्युञ्‍जयो मम । ॐ श्रीं शिवो ललाटं मे ॐ हौं भ्रुवौ सदाशिवः ॥ २॥ नीलकण...