महावशीकरण सिद्ध तांत्रिक ताबीज़।
महावशीकरण सिद्ध तांत्रिक ताबीज यंत्र- कई बार हम ऐसी परिस्थिति में आ फंसते हैं जब हमारे पास तंत्र-मंत्र और यन्त्र के उपायों का सहारा ही एक मात्र उपाय बचता है। जब तक हो सके इंसान सांप, सीढ़ी, वैश्या और ज्योतिषी से दूर रहना पसंद करता है पर जैसा की कहावत है की जब घी सीढ़ी उंगली से नहीं निकलता तो उंगली टेढ़ी करनी पड़ती है।
महावशीकरण सिद्ध तांत्रिक ताबीज यंत्र
महावशीकरण सिद्ध तांत्रिक ताबीज यंत्र
महावशीकरण एक ऐसा उपाय है जिसमें हम तंत्र विद्या और मंत्र विद्या और यन्त्र विद्या के ज़रिये दुर्लभ ढंग से किसी से वो काम करा सकते हैं जो वह अपने आपे में नहीं करने को तैयार होता। हमें यह बात एकदम साफ़ कर लेनी चाहिए की यह कार्य केवल और केवल तब ही किया जाये जब और बाकी सारे तरीके विफल हो गए हों। लेकिन आखिर क्यों करें वशीकरण के उपाय ? क्या मिलता है वशीकरण सिद्ध तांत्रिक ताबीज़ से ?
वशीकरण करने से आप किसी और इंसान को अपने वश में कर सकते हो – जैसे की सब के साथ होता है, वशीकरण करना आवश्यक होता है, बॉस को ऑफसर की डांट की वजह से, बीवी को पति की आदतों के बिगड़ने के वजह से, माँ-बाप को बच्चों की हिफाज़त की वजह से, प्यार-मोहब्बत जताने वाले लोगों को अपना प्यार पाने के लिए, युद्ध पे गए लोगों को क्षत्रु पर विजय प्राप्त करने के लिए।
वशीकरण से इंसान अपनी पर्सनालिटी और व्यक्तित्व को संवार लेता है – जब कोई व्यक्ति अपने आपको आकर्षक नहीं पाता तो वह दुस्सहित हो उठता है, वह बेवजह परेशान रहने लगता है, मायूसी में डूब जाता है और फ़ालतू के ख़यालों में खो जाता है। ऐसे में वशीकरण करने से आप अपने आपको आकर्षक, सुन्दर, एक अच्छी पर्सनालिटी और व्यक्तित्व वाला पाएंगे।
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वशीकरण से आप अपना साहस और बल बढ़ा पाएंगे, आप पाएंगे की आप रोज़ाना ही अपना कॉन्फिडेंस बढ़ता देख पाएंगे और समय के साथ और चटक-दार तथा अच्छे हाव-भाव वाले बन जाएंगे, यह सब आपके महावशीकरण सिद्ध तांत्रिक ताबीज़ से हो पायेगा।
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वशीकरण से आप अपने प्यार को इस दुनिये के मेले में खो देने से बचा पाएंगे – आपको यह करना होगा की आप बस इस विधि का प्रयोग करें और फिर देख पाएं की वशीकरण से आप अपने खोये या भूले-भटके साथी को वापस आता पाएंगे। आपकी दुनिया में वापस ख़ुशी की लहर दौड़ जाएगी और आप एक सफल इश्क़ के हक़दार हो जायेंगे।
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आप अगर शादी-शुदा हैं तो आप जानते हैं की सुहाग में अड़चन पड़ जाना कितना सरल है और उससे दूर करना कितना मुश्किल बात है, अगर आप पहले से ही वशीकरण का प्रयोग करते हैं तो ऐसा नहीं होगा और अगर आप बाद में इसका प्रयोग करते हैं तो आपकी बिगड़ती हुई पर्तिस्थिति बदल जाएगी और आप वापस खुश हो जायेंगे और ज़िन्दगी का लुत्फ़ उठा पाएंगे।
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अगर आप निराशाजनक सोच में पड़ गए हैं या फिर बहुत परेशान रहते हैं तो चाहे आपको कोई लाख समझाए आपकी टेंशन दूर करना तो आसान नहीं हैं मगर अगर आप हमारे बताये हुए रास्ते पे चलेेँगे तो आप पाएंगे की आप का दिमागी कूड़ा अपने-आप बाहर निकल जायेगा और आप एक सुखमई जीवन वापस जी पाएंगे। इस ताबीज़ को बनाने के लिए किसी भी पूर्णिमा या अमावस्या को सवेरे नहा-धो लें और साफ़ कपडे पहन कर पूजा कक्ष में बैठ जाएं, फिर बताये हुए मंत्र को अभिमंत्रित कर के, एक कागज़ के ऊपर लाल कलम से वही मंत्र लिख दें, अब इसे मोड़ कर खोके में बंद करके पहनाने के लिए तैयार कर लें।
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मंत्र जो की पढ़ना और लिख देना है है –
“ शृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्
कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्
गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्
पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्
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अथ मन्त्रह
ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
ओम ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहाः
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इति मन्त्रह
नमस्ते रूद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनिः I
नमह कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि II
नमस्ते शुम्भ-हन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिनि I
जाग्रतम हि महादेवि जपं सिद्धम कुरूष्व मे II
ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रति-पालिका I
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते II
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी I
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणि II
धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु
हुं हुं हुंकार-रूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः
अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं
धिजाग्रं-धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु-कुरु स्वाहा
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मन्त्र-सिद्धिं कुरुष्व मे
इदं तु कुञ्जिकास्तोत्रं मन्त्रजागर्तिहेतवे I
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति II
यस्तु कुञ्जिकाया देवि हीनां सप्तशतीं पठेत् I
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा II
इति श्रीरुद्रयमले गौरी-तन्त्रे शिव-पार्वतीसंवादे कुञ्जिकास्तोत्रं सम्पूर्णम “
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इस मंत्र को पढ़कर उसे लिख देने के बाद और तावीज़ बनाने के बाद उससे पहना दें।
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यह न भूलें वशीकरण ताबीज़ पहनने की जानकारी लोगों को कतई न दें, लोगों को पता चल जाने पर इस ताबीज़ का असर स्वाभाविक रूप से कम हो जायेगा। आप अपना कार्य चुपचाप करें और उसके पश्चात् पूजा कक्ष छोड़ दें और दिनचर्या में लीं हो जाएं। आप कुछ ही दिनों में पाएंगे की आपका काम सफल हो रहा है, लोग जिन्हें आप अपनी तरफ खींचना चाहते हैं आपकी ओर चले आएंगे और जो लोग आपको हानि पहुंचाते हैं वह आपसे दूर जा रहे हैं। यह कार्य संपन्न होना स्वाभाविक है क्यूंकि यह उपाय बहुत ही जाना-माना और कारगर है।
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आपको केवल यह ध्यान में रखना होगा की लोग इन चीज़ों के बारे में जाने नहीं। आप इसके पश्चात अपनी रोज़ की पूजा करते रहेें और ताबीज़ की ओर बिलकुल भी ध्यान नहीं दें, इसकी कोई ज़रुरत ही नहीं है। आपका कार्य संपन्न होगा और आप अपने जीवन में जो कुछ भी खो बैठे थे वापस अपने करीब आता पाएंगे। आपके इस सफल कार्य में दुर्गा सप्तशटी के कुछ श्लोकों का हाँथ है ! यह श्लोक मार्कण्डेय पुराण से लिए गए हैं और इनमें इतनी शक्ति है की ये आपका कार्य अवश्य सफल करवाएंगे।
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