*मन्त्र शक्ति से सब सम्भव*

*मन्त्र शक्ति से सब सम्भव* ................................................................................................................................................... *मन्त्र शक्ति से सब सम्भव* ................................................................................................................................................. _दोस्तों,_ ................................................................................................................................................. _हर धर्म में मंत्र जपने का बहुत महत्व है। मन को एक तंत्र में लाना ही मंत्र होता है। उदाहरणार्थ यदि आपके मन में एक साथ एक हजार विचार चल रहे हैं तो उन सभी को समाप्त करके मात्र एक विचार को ही स्थापित करना ही मंत्र का लक्ष्य होता है। यह लक्ष्य प्राप्त करने के बाद आपका दिमाग एक आयामी और सही दिशा में गति करने वाला होगा।_ ................................................................................................................................................. *मन्त्र के प्रकार* ................................................................................................................................................. *मंत्र जप तीन प्रकार हैं:-* ................................................................................................................................................. *1.वाचिक जप, 2. मानस जप और 3. उपाशु जप।* ................................................................................................................................................. *वाचिक जप में ऊंचे स्वर में स्पष्ट शब्दों में मंत्र का उच्चारण किया जाता है। मानस जप का अर्थ मन ही मन जप करना। उपांशु जप का अर्थ जिसमें जप करने वाले की जीभ या ओष्ठ हिलते हुए दिखाई देते हैं लेकिन आवाज नहीं सुनाई देती। बिलकुल धीमी गति में जप करना ही उपांशु जप है।* ................................................................................................................................................. _आपको यह तय करना होगा कि आप किस तरह के मंत्र को जपने का संकल्प ले रहे हैं। साबर मंत्र बहुत जल्द सिद्ध होते हैं, तांत्रिक मंत्र में थोड़ा समय लगता है और वैदिक मंत्र थोड़ी देर से सिद्ध होते हैं। लेकिन जब वैदिक मंत्र सिद्ध हो जाते हैं और उनका असर कभी समाप्त नहीं होता है।_ ................................................................................................................................................. *मन्त्र नियम* ................................................................................................................................................. मंत्र-साधना में विशेष ध्यान देने वाली बात है- मंत्र का सही उच्चारण। दूसरी बात जिस मंत्र का जप अथवा अनुष्ठान करना है, उसका अर्घ्य पहले से लेना चाहिए। मंत्र सिद्धि के लिए आवश्यक है कि मंत्र को गुप्त रखा जाए। प्रतिदिन के जप से ही सिद्धि होती है। किसी विशिष्ट सिद्धि के लिए सूर्य अथवा चंद्रग्रहण के समय किसी भी नदी में खड़े होकर जप करना चाहिए। इसमें किया गया जप शीघ्र लाभदायक होता है। जप का दशांश हवन करना चाहिए और ब्राह्मणों या गरीबों को भोजन कराना चाहिए। ................................................................................................................................................. *क्या होता मन्त्र का सम्बंध* ................................................................................................................................................. मंत्र का सीधा सम्बन्ध ध्वनि से है। ध्वनि प्रकाश, ताप, अणु-शक्ति, विधुत -शक्ति की भांति एक प्रत्यक्ष शक्ति है। मन्त्रों में नियत अक्षरों का एक खास क्रम, लय और आवर्तिता से उपयोग होता है। इसमें प्रयुक्त शब्द का निश्चित भार, रूप, आकार, शक्ति, गुण और रंग होता हैं। एक निश्चित उर्जा, फ्रिक्वेन्सि और वेवलेंथ होती हैं। ................................................................................................................................................. श्रद्धा और विश्वास, साधना के मेरुदण्ड हैं जिनके ऊपर ही यह शास्त्र फलित होता है। श्रद्धा और विश्वास को निरन्तर बनाये हुए रखकर समान संख्या का जप करना चाहिए। अपनी ओर से मन्त्र की संख्या में सुविधानुसार घट-बढ़ नहीं करनी चाहिए और न ही बार-बार मन्त्र और इष्ट देवता का परिवर्तन, अन्यथा कुछ भी हाथ नहीं लगता है। ................................................................................................................................................. *मन्त्र सिद्ध होने की अनुभूति कैसे पता होगी* ➿➿➿➿➿➿ मं‍त्र से किसी देवी या देवता को साधा जाता है, मंत्र से किसी भूत या पिशाच को भी साधा जाता है और मं‍त्र से किसी यक्षिणी और यक्ष को भी साधा जाता है। मंत्र जब सिद्ध हो जाता है तो उक्त मंत्र को मात्र तीन बार पढ़ने पर संबंधित मंत्र से जुड़े देवी, देवता या अन्य कोई आपकी मदद के लिए उपस्थित हो जाते हैं। ................................................................................................................................................. देवी मंत्रों के साधकों को जप के दौरान अनेक अनुभव होते हैं। इन अनुभवों के जरिए पता चल जाता है कि मंत्र सिद्ध हुआ या नहीं। कुछ ऐसे लक्षण भी होते हैं जिनका अनुभव होने पर मान लेना चाहिए कि मंत्र जप में कोई कमी रह गई है। मंत्र जप करने वाले की शरीर में कुछ प्रतिक्रिया होती है, कुछ अनुभव होते हैं। अगर मंत्र सिद्ध हो जाता है, तो सुषुम्ना नाड़ी में प्रकाश का अनुभव होता है और शरीर के छहों चक्र दिखाई देने लगते हैं। इसे देखने के लिए मन एकाग्र होना चाहिए। साधक को ऐसा अनुभव होता है कि शरीर के अंदर कई स्थानों पर तारे टिमटिमा रहे हैं।मंत्र का नियमित रूप से जप करने वाले या उसका पुरश्चरण करने वाले साधक को नींद में ईष्टदेव और गुरुदेव के दर्शन होते हैं। सुहागिन स्त्री या कन्या दिखाई देती है। यह सुहागिन या कन्या साधक को फूल या फल देती है। नींद में पूर्णिमा का चंद्रमा, गंगा, सूर्य, शिवलिंग दिखाई दे तो समझना चाहिए कि मंत्र सिद्ध हो रहा है। इसी तरह जमीन, नाव से नदी, तालाब, या समुद्र पार करना, अग्नि की पूजा, जलती हुई आग, हंस, कोयल, मोर, कन्या, छत्र, रथ, दीपक, महल, कमल, हाथी, बैल, फूलों की माला, रुद्राक्ष की माला, समुद्र, हरा पेड़ पर्वत, घोड़ा वगैरह दिखाई दे तो इसे मंत्र सिद्धि का लक्षण मानना चाहिए।इसी तरह उगता हुआ सूर्य, तारों से भरा आकाश, अपने आपको चढ़ता हुआ देखें तो यह सिद्धि के लक्षण हैं। ऋषियों ने मंत्र सिद्धि के और बहुत से लक्षण बताए हैं। स्वप्न में दही-चावल खाना, सफेद वस्त्र पहनना, शरीर में सफेद चंदन का लेप करना, खून से अपने आपको नहाते देखना, सिंहासन रथ, ध्वजा और गहना देखना, अपना या किसी दूसरे का राज्याभिषेक देखना, गुरु, देवता, ब्राह्मण, कन्या, हाथी, घोड़ा, सिंह, दर्पण, शंख और वाद्ययंत्र देखना, पकवान, मिठाई या पान खाना, मोतियों की माला पहनना, तेज तपता हुआ सूर्य देखना, पानी, दूध या शराब से भरा घड़ा देखना, मछली, घी या गोरोचन देखना। वेदमंत्र या मं‍गल गान सुनना, घोड़ी, भैंस, शेरनी, गाय या हथिनी का दूध दुहते देखना, अपना सिर कटते हुए देखना, पितर, गाय, ब्राह्मण या राजा को देखना। सोने-चांदी के बर्तन में खुद को भोजन करते देखना- यह सब सिद्ध मंत्र सिद्धि के लक्षण हैं। जगदंबा की उपासना के दौरान अगर साधक इस तरह का स्वप्न देखता है, तो उसे दूने उत्साह से उपासना में मन लगाना चाहिए। सिर्फ मंत्र जप ही नहीं, जगदंबा की किसी विधि से उपासना की जाए और ऐसे शगुन होने लगे, तो साधक की मनोकामना पूरी होती है। ................................................................................................................................................. *मन्त्र सिद्ध होने के बाद क्या करें* ................................................................................................................................................. यदि आप मन्त्र-साधना प्रारम्भ करते हैं तो मन्त्र का जप पूर्ण होने पर हवन अवश्य करें। हवन लौह-पात्र में न करें अन्यथा अनिष्ट फल की प्राप्ति होती है। पीपल के बड़े पात्र में या फर्श पर ईटें बिछाकर उस पर बालू डालकर, जमीन से चार-छः अंगुल ऊँची वेदी बनाकर यज्ञ सम्पन्न करें । पीपल, पलाश, गूलर, खैर, शमी, चन्दन आदि की समिधा का हवन में प्रयोग करें। आम वृक्ष की समिधा जो आजकल प्रायः हवन में प्रयुक्त ही जा रही है, उसका कोई शास्त्रीय आधार नहीं है, यह पूर्णतः वेद-विरुद्ध व आर्ष सिद्धान्तों के विपरीत है। ................................................................................................................................................. अंत में मंत्र जिन्न के उस चिराग की तरह है जिसे रगड़ने पर उक्त मंत्र से जुड़े देवता सक्रिय हो जाते हैं। मंत्र एक प्रकार से मोबाइल के नंबरों की तरह कार्य करता है। ................................................................................................................................................. कल आपके लिये मैं कोशिश करूंगा कुछ विशेष मन्त्र जिन्हें सिद्ध करके हम जीवन की परेशानियों से मुक्ति पा सकते हैं । ................................................................................................................................................. CONTACT......9306509077

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